किसान आंदोलन में देशद्रोह के आरोपियों की एंट्री, स्टेज पर बैनर लगा की रिहाई की मांग


नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की सरहदों पर पिछले दो हफ़्तों से चल रहे किसान आंदोलन में खालिस्तानी और जिहादी संगठन भी अपनी पैठ बनी की कोशिश में लगे हुए हैं। दिल्ली की टिकरी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों के मंच पर आपत्तिजनक बैनर दिखाई दिया, जिसको लेकर विवाद जारी है। भारतीय किसान यूनियन एकता के मंच पर मानवाधिकार दिवस के मौके पर उमर खालिद, शरजील इमाम सहित कई देश्द्रिहियों के फोटो वाला बैनर लगाया गया था।

इस बैनर में जेल में बंद देशद्रोह के आरोपियों को क्रांति का नायक बताते हुए रिहा करने की मांग की गई थी। भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के नेता झंडा सिंह का कहना है कि ये सिर्फ हमारे संगठन की ओर से पोस्टर लगाए गए थे। ये सभी बुद्धिजीवी हैं और हमारी मांग है कि जिन बुद्धिजीवियों को जेल में डाला गया है, उन्हें रिहा किया जाए।

झंडा सिंह के मुताबिक, 30 संगठनों ने सरकार को जो मांग पत्र दिया था, उनमें बुद्धिजीवियों और किसानों को रिहा करने की मांग थी। ये सभी बुद्धिजीवी हैं, ऐसे में कोई विवाद नहीं होना चाहिए। किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने कहा कि इन लोगों ने जन और जंगल की लड़ाई लड़ी है, इसलिए सरकार ने इन्हें गलत फंसा दिया है। लोगों ने कहा कि सरकार को इन सामाजिक कार्यकर्ताओं को जल्द से जल्द रिहा कर देना चाहिए।

  हैरानी की बात ये है कि ये बैनर अब भी बिना किसी डर के स्टेज पर लगा हुआ है, जबकि तमाम आरोपियों पर देश तोड़ने, देश में सांप्रदायिक सदभाव बिगाड़ने, जिहाद की साजिश करने और आतंकी गतिविधियों के षडयंत्र के आरोप में मुकदमे दर्ज हैं और ये सब देश की अलग-अलग जेलों में बंद हैं। इनमें से कुछ जमानत पर छूट गए हैं, जबकि कई अब भी जेलों में बंद हैं।

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