शिक्षण संस्थानों को संघर्ष का मैदान न बनाएं छात्र नेता
सुरभि भावसार छात्र राजनीति का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा करना, उनके समस्याओं का समाधान करना और शैक्षणिक संस्थाओं में सुधार के लिए आवाज उठाना है। यह एक ऐसा मंच है, जहां युवा नेतृत्व कौशल विकसित करते हैं, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का अभ्यास करते हैं और यहीं से भविष्य के नेता निकलते हैं । लेकिन पिछले कुछ सालों से ये संगठन गुंडागर्दी, हिंसा और अनुशासनहीनता के अड्डे बनते जा रहे हैं। अब यह राजनीति सत्ता प्रदर्शन और व्यक्तिगत स्वार्थों का साधन बन चुकी है। वर्तमान में कई छात्र संगठन राजनीतिक दलों से जुड़े हुए हैं और उनके इशारे पर काम करते हैं। शिक्षण संस्थानों में हड़तालें, प्रशासनिक भवनों पर कब्जा, शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार और शैक्षणिक गतिविधियों को बाधित करना आम हो गया है। छात्र नेताओं का रवैया अब अधिकारों की मांग करने के बजाय दबंगई दिखाने तक सीमित रह गया है। इसका ताजा उदाहरण होलकर साइंस कॉलेज में हाल ही में हुई प्राचार्या और 150 से ज्यादा प्रोफेसरों को बंधक बनाने की घटना है। होली उत्सव में मनमानी करने की अनुमति नहीं मिलने मात्र से कुछ विद्यार्थियों...