ट्रेंड बदला : जॉब से पहले स्किल्स परख रहीं कंपनियां, 35 प्रतिशत तक बढ़े इंटर्नशिप के मौके
- आइटी से लेकर मार्केटिंग और डिजाइन जैसे क्षेत्रों में ज्यादा डिमांड
- इधर, 21 से 30 साल के युवाओं को ‘शॉर्टकट’ से चाहिए कामयाबी
सुरभि भावसार
इंदौर. सिर्फ डिग्री हासिल करना अब अच्छी नौकरी की गारंटी नहीं है। बदलते जॉब मार्केट में कंपनियां सीधे भर्ती के बजाय इंटर्नशिप के जरिए युवाओं की स्किल्स परख रही हैं। खासकर जनरेशन जेड यानी 21 से 30 साल के युवा, जो कॅरियर में जल्दी बदलाव चाहते हैं, उनकी कार्यशैली को समझने के लिए कंपनियां यह तरीका अपना रही हैं। आइटी से लेकर मार्केटिंग और डिजाइन जैसे क्षेत्रों में यह ट्रेंड बढ़ रहा है। इंदौर भी इससे अछूता नहीं है। शहर में बीते दो साल में आइटी कंपनियों और स्टार्टअप्स में इंटर्नशिप के अवसरों में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
80 फीसदी इंटर्न्स को मिल रही स्थायी नौकरी
शहर की आइटी कंपनियों और स्टार्टअप्स के आंकड़ों के अनुसार, करीब 80 फीसदी स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप के बाद स्थायी नौकरी मिल रही है। खास बात यह है कि कंपनियां 3 से 6 महीने तक की इंटर्नशिप ऑफर कर रही हैं, जिसमें युवाओं को एम्प्लॉई जैसी जिम्मेदारियां दी जाती हैं। इस दौरान उनकी स्किल्स, व्यवहार और वर्क कल्चर के साथ तालमेल को परखा जाता है। बेहतर प्रदर्शन पर उसी कंपनी में स्थायी नौकरी मिल जाती है।
ये चिंता की बात : बिना सीखे ग्रोथ चाहते हैं युवा
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आज के युवाओं में सहनशीलता की कमी है। पहले युवा सीखने की चाहत रखते थे और उसके बाद आगे बढ़ते थे। अब युवा सीखना नहीं चाहते। वे सीधे तौर पर ग्रोथ चाहते हैं। युवा हर काम करवाना चाहते हैं। इस समय एआइ हर क्षेत्र में लोगों के लिए मददगार साबित हो रहा है, लेकिन यदि उससे भी काम लेना है तो प्रोम्प्ट इंजीनियरिंग सीखनी पड़ेगी। ऐसे में कई बार युवा तीन महीने की इंटर्नशिप कर अच्छा अवसर मिलने पर दूसरी कंपनी में स्विच कर जाते हैं।
स्किल्स की कमी से बढ़ी इंटर्नशिप की जरूरत
कंपनियों के अनुसार, आज के युवाओं के पास डिग्री तो है, लेकिन प्रैक्टिकल स्किल्स की कमी के कारण जॉब मार्केट में पीछे रह जाते हैं। हालांकि दो-तीन साल में यह गैप कम हुआ है। पहले 40-50 फीसदी युवाओं को इंटर्नशिप पर रखना पड़ता था। अब कंपनियां 60-70 फीसदी युवाओं को सीधे तौर पर हायर कर रही हैं। इनमें से 80 फीसदी परमानेंट जॉब में आ रहे हैं, बाकी 20 फीसदी छोड़कर चले जाते हैं। मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स के जरिए 20 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है।
सामने आ रहे इंटर्नशिप के फायदे
केस 1: डीएवीवी के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से सीएस करने वाले गौतम राठी ने साल 2024 में डिग्री पूरी की है। इसके बाद आइटी कंपनी में इंटर्नशिप की, जहां सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का काम कर प्रैक्टिकल नॉलेज लिया। उनके काम को देख कंपनी ने स्थायी नौकरी दी।
केस 2- इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने वाले अमित जोशी ने पढ़ाई के बाद मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में जॉब के लिए आवेदन किया, लेकिन स्किल्स की कमी के चलते कंपनी ने पहले 6 महीने की इंटर्नशिप पर रखा। चार महीने इंटर्नशिप के बाद काम बीच में ही छोड़ दिया और अब छोटी-मोटी नौकरी कर रहे हैं।
केस 3- एमबीए की छात्रा साक्षी वर्मा ने अपनी पढ़ाई के दौरान ही मार्केट की जरूरत के हिसाब से खुद काे डेवलप किया। वह हर काम को परफेक्शन से करती थीं। यही कारण रहा कि कैंपस ड्राइव में ही उनका प्लेसमेंट बड़ी कंपनी में हो गया, जहां वह प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर काम कर रही हैं।

शानदार खबर
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