चंद्रयान-2: डिगे नहीं है, अडिग है हम, लौटकर फिर आएंगे
सुरभि भावसार जीरो का आविष्कार हो या चांद पर जाने का सपना, भारत ने हमेशा ही अपने कारनामों से दुनिया को चौंकाया है। इस बार भले ही चांद पर पहुंचने में कामयाब नहीं हुए, लेकिन हौसले बुलंदी पर है। हालांकि चंद्रयान-2 के चांद से चंद कदम दूर तक पहुंचने के बाद संपर्क टूट गया था। इससे वैज्ञानिक निराश हो गए थे, मगर वह एक बार फिर पूरे जोश के साथ उठ खड़े हुए हैं। मिशन भले ही सफल नहीं हो पाया हो, पर हर भारतीय को वैज्ञानिकों की सालों की मेहनत पर गर्व है और इस सफलता पर वैज्ञानिकों को सेल्यूट किया है। ऐसा नहीं है कि चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर क्षतिग्रस्त हो गया है, उसका ऑर्बिटर अब भी पूरी शान से चांद के चक्कर लगा रहा है, जो लगभग सालभर तक शोध करेगा, साथ ही हर छोटी-छोटी जानकारी धरती पर भेजेगा। यह भी किसी सफलता से कम नहीं है, दुनिया के अन्य देशों के मिशन तो चांद के चक्कर लगाने से पहले ही धराशायी हो गए थे, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने चांद तक पहुंचने में सफलता हासिल की है। उपलब्धि की बात करें तो भारत से पहले अमेरिका, रूस और चीन चांद तक पहुंचे चुके हैं, मगर हम इस बार रह गए हैं, किं...