चंद्रयान-2: डिगे नहीं है, अडिग है हम, लौटकर फिर आएंगे


सुरभि भावसार 

जीरो का आविष्कार हो या चांद पर जाने का सपना, भारत ने हमेशा ही अपने कारनामों से दुनिया को चौंकाया है। इस बार भले ही चांद पर पहुंचने में कामयाब नहीं हुए, लेकिन हौसले बुलंदी पर है। हालांकि चंद्रयान-2 के चांद से चंद कदम दूर तक पहुंचने के बाद संपर्क टूट गया था। इससे वैज्ञानिक निराश हो गए थे, मगर वह एक बार फिर पूरे जोश के साथ उठ खड़े हुए हैं। मिशन भले ही सफल नहीं हो पाया हो, पर हर भारतीय को वैज्ञानिकों की सालों की मेहनत पर गर्व है और इस सफलता पर वैज्ञानिकों को सेल्यूट किया है। 

ऐसा नहीं है कि चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर क्षतिग्रस्त हो गया है, उसका ऑर्बिटर अब भी पूरी शान से चांद के चक्कर लगा रहा है, जो लगभग सालभर तक शोध करेगा, साथ ही हर छोटी-छोटी जानकारी धरती पर भेजेगा। यह भी किसी सफलता से कम नहीं है, दुनिया के अन्य देशों के मिशन तो चांद के चक्कर लगाने से पहले ही धराशायी हो गए थे, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने चांद तक पहुंचने में सफलता हासिल की है।

उपलब्धि की बात करें तो भारत से पहले अमेरिका, रूस और चीन चांद तक पहुंचे चुके हैं, मगर हम इस बार रह गए हैं, किंतु अगली बार लक्ष्य को भेदकर ही मानेंगे। ऐसा नहीं है कि ये तीनों देश अपने दम पर चांद तक पहुंचे, इसके लिए उनको भारतीय शक्ति का सहारा लेना पड़ा था। भारत के दशमलव और जीरो की खोज के बाद ही दुनिया धरती और चांद की दूरी का अंदाजा लगा पाई है। यदि भारत दुनिया को दशमलव नहीं देता तो आज इन देशों का भी चांद पर जाना मुमकिन नहीं था। 

हिंदुस्तान ने कई ऐसे कारनामे किए हैं, जिससे दुनिया की आंखें फटी रह गई। मंगल गृह पर तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड दुनिया में केवल भारत के नाम है। ये भारत ही है, जिसने दुनिया को चांद पर पानी होने की जानकारी दी है। हमने ही 100 से ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च करके नया इतिहास रचा है। जब सफलता इतनी हो तो एक-दो रुकावट हमें पीछे नहीं कर सकती।

आज चांद पर जाने का मिशन पूरा नहीं हुआ तो क्या हुआ, ये सपना टूटा नहीं है और ना ही हौसला कम हुआ है। आज चंद्रमा को छूने की हमारी इच्छाशक्ति और दृढ़ हुई है, संकल्प और प्रबल हुआ है। अब हम दोगुने हौसले से खड़े होंगे, हमारा विश्वास और बढ़ गया है। हिंदुस्तान एक असफलता से टूटकर मायूस होने वालों में से नहीं, बल्कि दोगुने जोश के साथ खड़े होकर लक्ष्य प्राप्त कर बैठने वालों में से है। हम उठेंगे, दौड़ेंगे और चांद पर भी पहुंचेंगे। आखिरी कदम पर भले ही रुकावट आई हो, लेकिन हम डिगे नहीं है।

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