Posts

Showing posts from May, 2020

ब्रांड नहीं किसान जरुरी

Image
सुरभि भावसार गांवों से दूर भागने और गांव के लोगों से सामाजिक दूरी बनाने वाले वही लोग आज गांवों की तरफ भाग रहे है। लॉकडाउन के समय जब सबकुछ बंद है तो लोगों को सामान आसानी से नहीं मिल पा रहा है और कही मिल भी रहा है तो बहुत महंगे दामों में। ऐसे में कई बार देखने में आया कि सुबह-सुबह लोग सब्जियों के लिए गांवों की ओर दौड़ रहे है। मॉल से हर चीज और ब्रांड वाली चीजें खरीदने वाले लोग भी आज किसानों से सब्जियां खरीद रहे है। जब ये नजारा देखों तो लगता है कि हम ब्रांड के बिना रह सकते है लेकिन किसान के बिना नहीं। वैसे भी जब अब प्रधानमंत्री ने लोकल के लिए वोकल बनने की बात कही है तो इसकी आदत डालनी भी होगी। हमें अब लोकल चीजों को ही अपनाकर उसे ब्रांड बनाना होगा। वैसे भी इस लॉकडाउन ने इतना तो सीखा ही दिया है कि मुसीबत के समय लोकल ही काम आता है। हर चीज मॉल से खरीदने वाले लोग भी आज सब्जियों के लिए गांवों में भटक रहे हैं। गांव की चीजों से दूर भागने वाले ही आज उन्ही के पीछे भाग रहे है। बड़े-बड़े मॉल तक पहुंच रखने वाले लोग आज अपने घरों में कैद है। जिन लोगों को हर छोटी से छोटी चीज ब्रांड वाली चाहिए होती है, वे लोग...

चला गया 'सपनों का सौदागर'

Image
सुरभि भावसार खुद को सपनों का सौदागर कहने वाले, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। पिछले काफी समय से तबीयत ख़राब होने के चलते वे अस्पताल में भर्ती थे और आज रायपुर के देवेन्द्र नगर स्थित नारायणा अस्पताल में उन्होंने दोपहर 3:30 बजे अंतिम सांस ली। उन्होंने इंदौर कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री पद तक का सफ़र तय किया और यह साबित कर दिया कि एक सफल प्रशासनिक अधिकारी किस तरह से सफल राजनेता भी बन सकता है। 29 अप्रैल 1946 को बिलासपुर के पेंड्रा रोड के जोगीडोंगरी में जन्में अजित जोगी बचपन में तेंदूपत्ता बीनकर, नंगे पैर स्कूल जाकर, किताबों के अभाव में पढ़कर आईएस बने। उन्होंने 1960 में भोपाल के मौलाना आज़ाद कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की और 1968 में IPS बने। अजीत डोभाल, तेलांगना के गवर्नर ई एस एल नरसिम्हन उनके बैचमेट थे। अपने करियर की शुरुआत बतौर कलेक्टर करने वाले जोगी जब इंदौर में कलेक्टरी कर रहे थें, तब वे तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के संपर्क में आए और 1986 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उनका राजनीतिक सिक्का चमकता गया और द...

क्या लॉकडाउन सिर्फ आम आदमी के लिए है?

Image
सुरभि भावसार आम आदमी लॉकडाउन में पिछले दो महीने से ज्यादा से घरों में कैद है। कुछ जरुरी काम के लिए भी यदि घर से बाहर निकलते है, तो उन्हें पुलिस का सामना करना पड़ता है। लेकिन लगता है कि लॉकडाउन के नियम नेताओं पर लागू नहीं होते। सिर्फ नेता ही नहीं इनके समर्थकों को भी लॉकडाउन में किसी तरह की रोक-टोक नहीं है। वे कही भी भीड़ लगा सकते है, कही भी आ-जा सकते है, लेकिन पुलिस इन्हें नहीं रोकती। यूं तो कोई आम आदमी बहार निकल जाए तो पुलिस उन्हें रोक लेती है लेकिन बिहार में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के बहार समर्थकों का जमावड़ा लग जाता है और पुलिस को शायद भनक तक नहीं लगती। शायद कोरोना भी जानता है कि ये किसी नेता के समर्थक है और मुझे यहां संक्रमण नहीं फैलाना है। इस मामले पर तेजस्वी यादव कहते है कि गोपालगंज में ट्रिपल मर्डर का शिकार हुए पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे है और इस दौरान वे सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रख रहे है। शायद वे भूल गए है कि सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब भीड़ लगाना नहीं, बल्कि एक-दूसरे से दो गज की दूरी रखना है। तमाम पुलिस बल एक नेता को रोकने के लिए तैनात कर दिया जाता है, फ़ोर्स ...