जब सत्ता खोकर नायक बन गए थे अटल जी
राजनीति के शीर्ष पुरुष, जिनके लिए देश हमेशा सर्वोच्च रहा, विरोध करते वक्त भी विपक्षी उनकी सच्चरित्रता, नैतिक पूंजी, स्वच्छ छवि का अतिक्रमण नहीं कर पाते थे, जिनकी जिंदगी के किस्से 'आदर्श राजनीति, लोकप्रिय नेता, सह्रदय कवि' पर चर्चा के दौरान जिक्र किए जाते हैं, कुछ ऐसे ही थे हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी। आज उनकी 96वीं जयंती पर देश उन्हें नमन कर रहा है।
राजनीति के भीष्मपितामाह कहे जाने वाले अटल बिहार वाजपेयी देश ही नहीं विदेशों में भी लोकप्रिय थे। उनके भाषण और बेबाक बोल के सभी दीवाने रहे। जब वह सदन में बोलने के लिए खड़े होते थे तो उन्हें हर कोई सुनना चाहता था। एक बार उन्होंने सदन में जो बात कही थी, उसे शायद ही कोई भूला होगा और शायद भूल भी नहीं सकता।
ममता बनर्जी का जुदा अंदाज, मच पर करने लगीं डांस
1984 में महज दो सीटों तक सीमित रह जाने वाली बीजेपी 1996 में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी थी। सरकार का चेहरा अटल बिहारी वाजपेयी बने। प्रधानमंत्री पद का शपथ लेने के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी लोकसभा में जरूरी बहुमत हासिल करने की। ऐसे में जब सरकार के मुखिया को मालूम था कि उनकी सरकार विश्वास मत हासिल नहीं कर पाएगी तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी विश्वास मत का प्रस्ताव पेश करने जा रहे थे। विपक्ष की गोलबंदी के आगे अटल जी की सरकार गिरना तय थी।
इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी का भाषण और वो अंदाज जिसने भी देखा सुना वो कभी भूल नही पाया। उन्होंने बड़े बेबाक तरीके से अपने भाषण में कहा था, 'आज प्रधानमंत्री हूं, थोड़ी देर बाद नहीं रहूंगा, प्रधानमंत्री बनते समय कभी मेरा दिल आनंद से उछलने लगा ऐसा नहीं हुआऔर ऐसा नहीं है कि सब कुछ छोड़छाड़ के जब चला जाऊंगा तो मुझे कोई दुख होगा....'
कोरोना के साइड इफ़ेक्ट: ठीक हुई महिला के शरीर में जमा पस, हैरत में डॉक्टर्स
उस दौरान अपने राजनीतिक सिद्धांतों के लेकर उन्होंने साफ कह दिया था, 'मैं 40 साल से इस सदन का सदस्य हूं, यहां के सदस्यों ने मेरा बर्ताव देखा, मेरा आचरण देखा लेकिन यदि पार्टी तोड़कर नया गठबंधन करने से सत्ता हाथ में आती है, तो मैं ऐसी सत्ता को चिमटे से भी छूना पसंद नहीं करूंगा... भगवान राम ने कहा था कि मैं मृत्यु से नही डरता मैं बदनामी से डरता हूं... लोकोपवाद से डरता हूं.... '
सरकार बनाने के लिए तैयार विपक्ष को गठबंधन की राजनीति की सीमाओं पर चेतावनी देते वाजपेयी ने अपने भाषण की आखिरी लाईन से पूरे देश को चौका दिया जो एक इतिहास बन गया। उनकी आखिरी लाईन थी – ‘हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं.. हम अपने देश के सेवा कार्य में जुटे रहेंगे। हम संख्या बल के आगे सर झुकाते हैं औऱ आपको विश्वास दिलाते हैं कि जो कार्य हमने अपने हाथ में लिया है, वो जबतक राष्ट्र उद्देशय पूरा नही कर लेगें तब तक विश्राम से नही बैठेंगे, आराम से नही बैठेंगे... अध्यक्ष महोदय मैं अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को देने जा रहा हूं।’
अटल जी ने हमेशा देश को सबसे ऊपर रखा। अपने इस्तीफे के ऐलान के साथ ही अटल जी ने सदन में कहा था, ‘सत्ता का खेल तो चलेगा...सरकारें आएंगी जाएंगी.... पार्टियां बनेंगी बिगड़ेंगी.... मगर ये देश रहना चाहिए.... इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए... .’ अटल जी के भाषण के बाद उनकी सरकार गिर गई लेकिन देश की जनता की नज़रों में वो नायक बन गए। ये भाषण एक बानगी थी, एक झलक थी प्रखर वक्ता अटल की, उनकी राजनीति की। इस भाषण से लोगों के मन में अटल बिहारी वाजपेयी की ऐसी अमिट छवि बनी जो कभी धूमिल नही हुई। उनकी ये छवि न सिर्फ उनके दौर के लोग बल्कि पीढ़ियां याद रखेंगी।
भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें नमन
सुरभि भावसार

Comments
Post a Comment