वायु प्रदूषण से भारत को 1.4 प्रतिशत GDP का नुकसान, लगभग 17 लाख की मौत



नई दिल्ली
: साल 2019 में वायु प्रदूषण से भारत में लगभग 17 लाख लोगों की जान गई है। ये चौंकाने वाला खुलासा आईसीएमआर की एक रिपोर्ट में हुआ है, जो ग्लोबल डिजीज बर्डन स्टडी में पेश की गई। रिपोर्ट के मुताबिक़, 2019 में भारत में वायु प्रदूषण से न केवल 17 लाख लोगों की जान गई है, बल्कि देश को को 2 लाख 60 हज़ार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। प्रदूषण के चलते देश को हुआ ये नुकसान GDP के 1.4 प्रतिशत जितना है।

स्टडी में बताया गया है कि GDP को हुए 1.4 प्रतिशत के नुकसान में से सबसे अधिक 36.6 प्रतिशत नुकसान फेफड़ों की बीमारियों के कारण हुआ। इसके अलावा इस्केमिक हृदय रोगों के कारण 24.9 प्रतिशत, स्ट्रोक के कारण 14.1 प्रतिशत, डायबिटीज के कारण 8.4 प्रतिशत, नवजातों में बीमारियों के कारण 13.3 प्रतिशत और मोतियाबिंद के कारण 2.7 प्रतिशत का नुकसान हुआ।

राज्यों की बात करें तो वायु प्रदूषण के कारण उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 2.2 प्रतिशत GDP का नुकसान हुआ, वहीं 2 प्रतिशत नुकसान के साथ बिहार दूसरे स्थान पर रहा। उत्तर प्रदेश को 5.13 अरब डॉलर और बिहार को 1.55 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। आंकड़ों के मुताबिक, हर घंटे 282 और हर रोज़ 4 हज़ार 383 लोगों ने प्रदूषण के चलते अपनी जान गंवाई।

आईसीएमआर की स्टडी में बताया गया है कि 29 वर्षों में इनडोर वायु प्रदूषण 64% घटा जबकि आउटडोर वायु प्रदूषण 115% तक बढ़ गया। द लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ में प्रकाशित डेटा के मुताबिक, ज्यादातर मौतों की वजह पार्टिकुलेट मैटर PM 2.5 यानी हवा में मौजूद धूल के कण और इनडोर प्रदूषण है।

भारत में प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर दिल्ली में और सबसे कम केरल में देखा गया। 4 राज्यों में सबसे ज्यादा प्रदूषण का असर, दिल्ली, हरियाणा, बिहार और उत्तर प्रदेश में देखा गया है। 56 प्रतिशत आबादी अभी भी चूल्हे पर खाना पकाती है जो प्रदूषण की वजह बनता है। इस स्टडी के मुताबिक, प्रदूषण की वजह से भारत के साल 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनने के सपने को झटका लग सकता है।

कुल 16 लाख मौतों में से 9 लाख 80 हज़ार लोगों की मौत पीएम टू की वजह से हुई है। वहीं, 6 लाख दस हजार मिलियन लोगों ने घरेलू प्रदूषण की वजह से अपनी जान गंवाई और 1 लाख 70 हज़ार लोगों की जान ओज़ोन प्रदूषण ने ले ली।

Comments