चुनाव हारने के बाद मानसिक रूप से बीमार हो गए हैं डोनाल्ड ट्रंप!



डोनाल्ड ट्रंप ने वैसे तो अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर रहते हुए खूब सुर्खियाँ बटोरी। कभी अपने बयानों को लेकर तो कभी अपनी हरकतों को लेकर, लेकिन जाते-जाते उन्होंने वो कर डाला जो अमेरिका के इतिहास में शायद ही कभी हुआ हो और हुआ भी हो तो कई सालों पहले। इसको लेकर दुनियाभर की मीडिया में वह चर्चा का विषय बन गया।  ये चर्चा ना उनके बयान को लेकर ना हरकतों को लेकर, बल्कि हिंसा को लेकर थी। दरअसल, 7 जनवरी को ट्रंप समर्थकों ने वाशिंगटन स्थित देश की संसद कैपिटल हिल पर हमला कर दिया था। ट्रंप समर्थक प्रदर्शनकारी संसद में घुस गए थे, जिससे वहां अफरा-तफरी का महौल बन गया था। इस दौरान वहां गोलियां भी चली, जिसमें महिला सहित करीब चार लोगों की मौत हो गई थी।

 राष्ट्रपति चुनाव में मिली हार ने क्या डोनाल्ड ट्रंप की मानसिक स्थिति पर असर किया है? क्या ट्रंप मानसिक रूप से बीमार हैं और इसी बीमारी में वह कैपिटल हिल  जैसी घटनाओं को अंजाम देने के लिए समर्थकों को भड़का रहे हैं? इस तरह के सवाल इस लिए उठ रहे है क्योकि राष्ट्रपति पड़ के चुनाव में मिली हार के बाद ट्रंप अजीबोगरीब बर्ताव कर रहे हैं। विपक्ष भी लगाया उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर हमलावर है। विपक्षी दल से लेकर सदन की स्पीकर नैंसी पेलोसी तक ट्रंप की दिमागी सेहत को अस्थिर कह रही हैं।  वैसे, जिस तरह का रुख ट्रंप ने पिछले कुछ समय में प्रदर्शित किया है, उससे इस तरह के दावों को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। 

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एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि व्हाइट हाउस के कई स्टाफ मेंबर्स ने बीते दिनों डोनाल्ड ट्रंप की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने शिकायत की थी कि ट्रंप न सिर्फ अकेले में बड़बड़ाते रहते हैं बल्कि चिल्लाने भी लगते हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हार के बाद ट्रंप के रुख से अपनों के बीच उन्हें लेकर नाराजगी बढ़ रही थी। यहां तक कि ट्रंप के परिवार के सदस्य भी चाहते थे कि वो हार स्वीकार कर लें।

राष्ट्रपति चुनाव में शिकस्त के बाद से डोनाल्ड ट्रंप कई बार अपने बयान बदल चुके हैं। कभी उन्होंने अपनी हार स्वीकारी, तो कभी वापस अपनी जीत के दावे करने लगे। इससे कहीं न कहीं उन दावों को बल मिलता है, जिनमें राष्ट्रपति की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं। यदि ट्रंप वास्तव में मानसिक रूप से बीमार हैं, तो कैपिटल हिल हिंसा के बाद उनकी स्थिति और बिगड़ सकती है, क्योंकि इस घटना ने देश ही नहीं पूरी दुनिया में उनके खिलाफ माहौल तैयार कर दिया है।

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खैर ट्रंप पहले ऐसे राष्ट्रपति नहीं रहे हैं, जिस्नके बारे में ऐसा कहा जा रहा हो। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपतियों के बारे में ये कहा जा चुका है।  आर्थिक और सैन्य तौर पर दुनिया के इस सबसे मजबूत देश का सबसे ताकतवर पद अपने साथ काफी सारी परेशानियां लाता है। ऐसे में इस पद पर पहुंचा शख्स कई मानसिक समस्याओं का शिकार हो जाता है।

अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन के बारे में भी यही कहा गया था। वे अमेरिकी राष्ट्रपति में भी सबसे ऊपर माने जाते हैं, जिनकी तस्वीर डॉलर पर होती है। सेना प्रमुख भी रह चुके इस बेहद ताकतवर राष्ट्रपति के बारे में कई बार खबरें आईं कि उनमें खुदकुशी की प्रवृति है। गंभीर हालातों में उनके इमोशनल ब्रेकडाउन की बातें भी कहीं गईं। बाद में ये बातें दबा दी गईं ताकि जनता का अपने पहले ही राष्ट्रपति से यकीन न उठ जाए।

दूसरे राष्ट्रपति जॉन एडम्स को उनके विरोधी सीधे-सीधे पागल कहा करते थे। विपक्षी पार्टी का अखबार Philadelphia Aurora राष्ट्रपति एडम्स को ऐसा शख्स कह चुका था, जिसकी सोचने-समझने की ताकत जा चुकी है। देश के 26 वें राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट के बारे में भी यही कहा जाता था। एक इतिहासकार हेनरी एडम्स ने रूजवेल्ट के बारे में ये तक एलान कर दिया था कि वे जल्दी ही एक्यूट मेनिया के शिकार हो सकते हैं। 28वें अमेरिकी राष्ट्रपति वूड्रो विल्सन को स्ट्रोक हुआ था। इसके तुरंत बाद वाइट हाउस के पहले फ्लोर के कमरों में खिड़कियों के आगे लोहे का मोटा जंगला लगाया गया था। तब आलोचकों ने कहना शुरू कर दिया कि ये जंगला पागल राष्ट्रपति को बाहर आने से रोकने के लिए लगा है।

 



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