मत भूल जाना इनकी मोहब्बत...
सुरभि भावसार
14 फरवरी, यानि इजहार-ए-मोहबत्त का दिन वेलेंटाइन डे। आज दुनिया प्यार के संदेश बांट रही है। हर कोई अपने प्रेमी के साथ प्यार के जश्न में डूबा होगा। कोई अपने प्यार के लिए इस दिन को ख़ास बनाने की तैयारियां कर रहा होगा, तो कोई अपने प्यार का इजहार करने की कोशिश कर रहा होगा लेकिन इन सबके बीच उन शूरवीरों को मत भूल जाना, जिन्होंने जब अपने प्यार का इजहार किया तो कोई आंसू नहीं रोक पाया।
2019, में जब लोग प्यार की कसमें खा रहे थे, जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने का वादा कर रहे थे तब वतन के रखवालों ने भारत माता से किया अपना वादा निभा दिया। हम बात कर रहे हैं जम्मू-कश्मीर में हुए पुलवामा हमले की। आज पुलवामा हमले को दो साल हो गए है। पुलवामा हमले में 40 जवानों की शाहदत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। ये वो दिन है, जो भारत के लिए मातम का दिन बन गया। हमले का जो मंजर जिसनें देखा उसकी रूह कांप उठी थी। जवानों के क्षत-विक्षत शव सड़क पर बिखरे पड़े थे।
अपने जवानों की शाहदत के बाद पूरे देश में गुस्सा था और बदले की मांग होने लगी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बयान दिया था कि, जो आग आप लोगों के दिल में है, वही आग मैं भी महसूस कर रहा हूं। उन्होंने आतंक के आकाओं को इसकी कीमत चुकाने की चेतावनी दे डाली थी। CRPF ने भी साफ़ लफ़्ज़ों में कह दिया था 'ना भूलेंगे ना माफ़ करेंगे' और हुआ भी यही।
देश पर हुए प्रहार और अपने साथियों को खोने के दुःख सेना को भी था और वो भी सिर्फ सरकार की हां का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही सरकार ने हरी झंडी दिखाई सेना ने तैयारियां शुरू कर दी और 25-26 फरवरी की रात सेना के मिराज लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी और पाकिस्तान के अंदर घुसकर आतंकियों के अड्डों को तबाह कर दिया। एयरस्ट्राइक कर भारत ने दुनिया को अपने शौर्य और शक्ति का परिचय दे दिया था। साथ ही ये भी बता दिया था कि आतंकवाद किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।
इस हमले के बाद कश्मीर में बहुत कुछ बदला। जम्मू-कश्मीर को देश से अलग रखने वाले सबसे बड़े कांटे को सरकार ने उखाड़ फेंका। पांच अगस्त 2019 को गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर दिया। साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया।
अब कश्मीर की तस्वीर बदलने लगी है। ऐसा इसलिए क्योकि राज्य में पंचायत, ब्लाक और डीडीसी चुनाव शांतिपूर्ण हुए और लोगों ने भी बढ़-चढ़कर मतदान किया। जो हाथ बंदूक पकड़ने को मजबूर हो रहे थे, उन हाथों में अब कलम नजर आने लगी है। जो युवा आतंक की राह पर चल पड़े थे, वे अब अपना भविष्य संवारने में लग गए है। जम्मू-कश्मीर की अवाम अब सिर्फ और सिर्फ जन्नत ए कश्मीर में प्यार की बोली बोलना चाहती है।
आज पुलावामा हमले की दूसरी बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि।

Comments
Post a Comment