चीन को उसी की भाषा में मिलेगा जवाब, ITBP ने की ख़ास तैयारी




लद्दाख में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी। हालांकि इस तनाव को बातचीत से कम करने की कोशिश की जा रही है। कई दौर और कई स्तर की बातचीत के बाद चीनी सेना अपनी मौजूदा जगह से दो किलोमीटर तक पीछे भी हटी थी लेकिन चीन अपनी चालबाजी से बाज नहीं आ रहा है।

चीन की हरकतों को देखते हुए भारत ने भी अपनी पूरी तैयारी कर रखी है। चीन को हर तरह से करारा जवाब देने के लिए भारतीय सेना अलर्ट पर है। गलवान घटी की घटना के बाद भारत उसे हर तरह से पस्त करने में लगा हुआ है। इसी बीच चीन को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए सेना एक ख़ास तैयारी कर रही है।

दरअसल, भारत-तिब्बत सीमा  पुलिस के 90 हजार जवानों को चीन की मंदारिन भाषा सिखाने की तैयारी है। जवानों को एडवांस मंदारिन भाषा की ट्रेनिंग दी जाएगी। सीमा पर चीनी सैनिकों को अपनी बात समझाने में जवानों को काफी परेशानी होती थी। इसके लिए जवान पोस्टर्स का इस्तेमाल करते थे।

शुरुआत में आईटीबीपी ने मसूरी की अकैडमी में इस कोर्स की शुरुआत करने की पूरी तैयारी कर ली है। हालांकि कोरोना के चलते अभी यह शुरू नहीं हो पाया है। इस कोर्स का उद्देश्य सीमा पर बेहतर संवाद स्थापित कर पाना होगा। आईटीबीपी के हर जवान को यह कोर्स पूरा करना होगा। पहले भी कुछ जवानों की इसकी ट्रेनिंग दी जाती थी लेकिन संख्या काफी कम थी। अब कोर्स का नया प्रारूप तैयार किया जा रहा है। अभी तक जवान मामूली मंदारिन भाषा जानते हैं।

ऐसे होता है सेनाओं के बीच संवाद

यदि चीनी सेना भारत में घुसपैठ करती है तो वहां तैनात जवान उन्हें लाल रंग का पोस्टर दिखाती है जिसपर 'गो बैक' लिखा जाता है। चीनी भाषा की ट्रेनिंग के बाद जवानों को आसानी होगी और वे सीधा उन्हें वापस जाने की चेतावनी दे सकेंगे। मंदारिन भाषा में 'नी हाओ' का मतलब 'नमस्कार' होता है और 'हुऊ कू' का मतलब 'वापस जाओ' होता है।

इसके अलावा सीमा पर चीन की सेना  अपनी भाषा में आपस में बात करती है, तो भारतीय सेना को उनकी बातें समझ में नहीं आती। इसके चलते कम्युनिकेशन गैप होता है और अधिकारियों तक योजना की जानकारी नहीं पहुंच पाती है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए अब जवानों को मंदारिन भाषा सिखाई जाएगी।





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