लद्दाख के गांव का देशप्रेम, हर घर में हैं सैनिक
देश की सेवा करने के लिए कई लोग भारतीय सेना में जाने का सपना देखते है। सेना में जाने के लिए छोटी उम्र से ही तैयारियां शुरू कर देते है। हालांकि ये सपना पूरा करना इतना भी आसान नहीं होता क्योकिं भारतीय सेना में शामिल होने के लिए कई कठिन ट्रेनिंग से गुजरना होता है। कई बार तो कुछ नौजवान ट्रेनिंग से घबराकर वापस लौट आते है और कुछ में इतना जुनून होता है कि परिस्थितियां चाहे जो हो वे हार नहीं मानते।
देश के अलग-अलग हिस्से से लोग सेना में शामिल होते है लेकिन लद्दाख का एक गांव ऐसा है जहां हर घर में सैनिक है। 63 घरों के इस गांव में हर घर में एक सैनिक रहता है। इनकी पोस्टिंग लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के समीपवर्ती इलाकों में हुई है।
चुशोत गांव के लोग पीढ़ियों से देश की सेवा कर रहे हैं। यहां के लोग लद्दाख स्काउट, इन्फ्रेंट्री रेजीमेंट का हिस्सा भी हैं। कोमल मन, विनम्र स्वभाव के साथ खतरनाक योद्धाओं ने पुरानी परंपराओं को जारी रखा है। यहां के ज्यादातर लोग सेना में अपनी सेवाएं देते है।
नहीं हैं बेहतर स्कूल
दरअसल, इस गांव में अच्छे स्कूल नहीं है। ऐसे में गांव के लोग अपने बच्चों के करियर को लेकर चिंता में रहते हैं। शिक्षा का अभाव यहां लोगों को पीछे खींच रहा है। महिला और पुरुष दोनों की चिंताएं शिक्षा को लेकर यहां एक सी हैं।इस गांव के महिला और पुरुषों का संयुक्त रूप से मानना है कि अच्छी शिक्षा मिले तो यहां के लोगों का भविष्य बेहतर हो सकता है।
यहां मौजूद ज्यादातर महिलाओं का कहना है कि वे भी सेना में शामिल होना चाहती हैं लेकिन महिलाओं को रणक्षेत्र में उतारने के लिए अवसर नहीं दिया जाता। यदि उनके पास अच्छी शिक्षा हो तो वे अधिकारी बन सकती हैं, साथ ही बेहतर अवसर मिले तो दूसरे क्षेत्रों में भी जा सकती हैं।
हाई स्कलू से ज्यादा नहीं पढ़ती हैं लड़कियां
यहां की रुकैया बानो कहती हैं कि वह ग्रेजुएशन करने तो गई थीं, लेकिन उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। वह फिलाहल नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन में काम करती हैं। सरकार द्वारा चलाए जा रहे इस मिशन के जरिए महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है।
यहां ज्यादातर लड़कियां हाई स्कूल से ज्यादा नहीं पढ़ती हैं और लड़के 12वीं तक ही पढ़ पाते हैं, जिसके बाद वे भारतीय सेना में शामिल होते हैं। साथ ही सेना में शामिल होने वाले यहां के लोगों को अगर अच्छी शिक्षा मिलती तो ये सेना में अधिकारी के तौर पर भी उभरते हैं।

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