'अब जीतकर की वापस आना है' गलवान घाटी में शहीद जवान की पत्नी की अपील


 
भारत-चीन सीमा पर चल रहे तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेह पहुंचकर सबको चौंका दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अपने इस सरप्राइस दौरे से चीन और पूरी दुनिया को संदेश दे दिया है कि हम पीछे हटने वाले नहीं है। पीएम के लेह दौरे के दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बिपिन रावत भी मौजूद रहे। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेना, वायुसेना के अधिकारियों ने जमीनी हकीकत की जानकारी दी।



पीएम मोदी के इस दौरे से सेना का मनोबल भी बढ़ा है। पीएम मोदी का जवानों के बीच सीमा पर जाना उन शहीदों के परिवारवालों के लिए भी ऐतिहासिक लम्हा था, जिन्होंने गलवान घाटी में हुई उस खूनी झड़प में अपना सरवोछ बलिदान दिया था। इस दौरान शहीद कर्नल संतोष बाबू की भावुक हो गई और उन्होंने प्रधानमंत्री ने अपील की कि अब जीतकर ही वापस आना है।

इस ऐतिहासिक लम्हे पर शहीद कर्नल संतोष बाबू की पत्नी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा पर पहुंचकर जवानों का हौंसला बढ़ाया है। उन्हें पीएम से अपील की कि अब उम्मीद मत छोड़ना। अब जीतकर ही वापस आना है।



पीएम मोदी के इस दौरे ने सीमा पर कठिन परिस्थितयों में तैनात जवानों में नया जोश भर दिया है। जब पीएम वहां पहुंचे तो 'वंदे मातरम्', 'भारत माता की जय' से लेह गूंज उठा। लेह में जवानों को श्रद्धांजलि देने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में चीन के विस्तारवादी सोच से लेकर युद्धभूमि में बुद्ध संदेश तक तमाम बातें कीं।

पीएम ने बिना नाम लिए चीन को चेतावनी दे डाली कि विस्‍तारवाद का युग समाप्‍त हो चुका है, ये युग विकासवाद का है। तेजी से बदलते हुए समय में विकासवाद ही प्रासंगिक है। विकासवाद के लिए ही अवसर हैं और विकासवाद ही भविष्‍य का आधार भी है। बीती शताब्दियों में विस्‍तारवाद ने ही मानवता का सबसे ज्‍यादा अहित किया, मानवता को विनाश करने का प्रयास किया।

 विस्‍तारवाद की जिद जब किसी पर सवार हुई है, उसने हमेशा विश्‍व शांति के सामने खतरा पैदा किया है। ये न भूलें, इतिहास गवाह है कि ऐसी ताकतें मिट गई हैं या मुड़ने के लिए मजबूर हो गई हैं। विश्‍व का हमेशा यही अनुभव रहा है और इसी अनुभव के आधार पर अब इस बार फिर से पूरे विश्‍व ने विस्‍तारवाद के खिलाफ मन बना लिया है। आज विश्‍व विकासवाद को समर्पित है और विकास की खुली स्‍पर्धा का स्‍वागत कर रहा है।



प्रधानमंत्री ने जवानों की तारीफ़ करते हुए कहा कि विश्‍व युद्ध हो या फिर शांति की बात- जब भी जरूरत पड़ी है विश्‍व ने हमारे वीरों का पराक्रम भी देखा है और विश्‍व शांति के उनके प्रयासों को महसूस भी किया है। हमने हमेशा मानवता की, इंसानियत की रक्षा और सुरक्षा के लिए काम किया है, जीवन खपाया है। आप सभी भारत के इसी लक्ष्‍य को, भारत की इसी परंपरा को, भारत की इस महिमहान संस्‍कृति को स्‍थापित करने वाले अगुवा लीडर हैं।

भारत आज जल, थल, नभ और अंतरिक्ष तक अगर अपनी ताकत बढ़ा रहा है तो उसके पीछे का लक्ष्‍य मानव कल्‍याण ही है। भारत आज आधुनिक अस्‍त्र–शस्‍त्र का निर्माण कर रहा है। दुनिया की आधुनिक से आधुनिक तकनीक भारत की सेना के लिए ला रहे हैं तो उसके पीछे की भावना भी यही है। भारत अगर आधुनिक इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर का निर्माण तेजी से कर रहा है तो उसके पीछे का संदेश भी यही है।

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