चीन के खिलाफ अमेरिका ने खोला मोर्चा, इस कदम से डर गया बीजिंग
अमेरिका और चीन के रिश्ते पिछले काफी महीनों से अच्छे नहीं चल रहे है। इसके बाद दुनियाभर में फैली कोरोना महामारी को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ गया था और अब दक्षिण चीन सागर को लेकर दोनों देश आमने सामने है। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती हलचल को लेकर अमेरिका लगातार सख्त तेवर अपनाए हुए है।
हाल ही में चीन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर के तमाम इलाकों पर उसके दावे को खारिज कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए कहा कि दक्षिण चीन सागर में चीन के दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है और वह इस इलाके में अपनी मर्जी नहीं थोप सकता। 21वीं सदी में चीन के आक्रामक नजरिए के लिए कोई जगह नहीं है।
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अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा, दुनिया बीजिंग को दक्षिण चीन सागर को अपना समुद्री साम्राज्य नहीं बनाने देगी। अमेरिका अपने दक्षिण-पूर्व एशिया के सहयोगी देशों के साथ खड़ा है। अमेरिका दक्षिण चीन सागर या किसी भी दूसरे बड़े इलाके में शक्ति के दम पर कब्जे की हर कोशिश को खारिज करता है और समुद्री इलाकों की सुरक्षा में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ खड़ा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, हम एक बात स्पष्ट कर रहे हैं कि दक्षिण चीन सागर में तमाम संसाधनों पर चीन का दावा उतना ही गैर-कानूनी है जितना इन इलाकों पर नियंत्रण करने के लिए देशों को डराने-धमकाने का उसका अभियान। अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में समुद्री क्षेत्र में बेरोक-टोक व्यापार जारी रखने के पक्ष में है और सैन्य बल या धमकी से विवादों के समाधान की किसी भी कोशिश का विरोध करता है।
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गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर में चीन और वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्रुनेई, फिलीपींस, ताइवान के बीच विवाद है। नाइन-डैश-लाइन के नाम से पहचाने जाने वाले इस इलाके पर चीन अपना दावा पेश करता रहा है और इस क्षेत्र में कृत्रिम द्वीप बना रहा है।पिछले कुछ दिनों में चीन ने अपनी नौसेना की मौजूदगी भी इन इलाकों में बढ़ा दी है जिससे दक्षिण चीन सागर में तनाव और बढ़ गया है।

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