अब पीएम का नया दावा- 'भारतीय नहीं है श्रीराम, असली अयोध्या तो नेपाल में है'
सालों से चले आ रहे अयोध्या में विवादित भूमि का समाधान अभी कुछ महीनों पहले हुआ है। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि अयोध्या में विवादित स्थान पर राम मंदिर बनेगा। इसी बीच अयोध्या को लेकर नेपाल ने नया राग छेड़ दिया है। अभी तक नेपाल भारात पर सीमा पर अतिक्रमण का आरोप लगा रहा था लेकिन अब उसने सांस्कृतिक अतिक्रमण का नया राग अलापना शुरू किया है।
दरअसल, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अयोध्या को भारत में मानने से ही इनकार कर दिया है। ओली का कहना है भारत में जो अयोध्या है वो नकली है, असली अयोध्या तो नेपाल में है। ओली ने आगे कहा कि भारत ने सांस्कृतिक अतिक्रमण के लिए वहां नकली अयोध्या का निर्माण किया है, जबकि असली अयोध्या तो नेपाल में है।
कवि भानुभक्त आचार्य की जयंती पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओली ने कहा कि नेपाल पर सांस्कृतिक रूप से अत्याचार किया गया है और ऐतिहासिक तथ्यों को भी तोड़ा-मोड़ा गया है। हम सब भी यही जानते है कि हमने भारत में स्थित अयोध्या के राजकुमार राम के साथ हमारी सीता की शादी की थी लेकिन इसके बाद जो ओली ने कहा वो सचमुच बहुत हास्यास्मद है।
दरअसल, ओली ने दावा किया कि हमने भारतीय राजकुमार को नहीं, बल्कि नेपाल में स्थित अयोध्या के राजकुमार के साथ हमारी सीता की शादी की थी। भगवन श्रीराम भी नेपाली है। अयोध्या एक गांव है जो बीरगंज के थोड़ा पश्चिम में स्थित है। ओली ने कहा, 'भारत में बनाया गया अयोध्या वास्तविक नहीं है।'
इतना ही नहीं ओली ने तर्क दिया कि अगर भारत की अयोध्या वास्तविक है तो वहां से राजकुमार शादी के लिए जनकपुर कैसे आ सकते हैं? उन्होंने दावा किया कि ज्ञान-विज्ञान की उत्पत्ति और विकास नेपाल में हुआ।
इस्तीफे की मांग तेज
नेपाल में पीएल ओली को लकर विवाद बढ़ता जा रहा है और उनके इस्तीफे की मांग भी तेज हो गई है। संभावना जताई जा रही है कि बजट सत्र को स्थगित करने के बाद वो एक अध्यादेश लाकर पार्टी को तोड़ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक़ ओली वहां की मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस से समर्थन लेने की संभावना तलाश रहे हैं।
चीन-पाकिस्तान का मिल रहा समर्थन
विपक्षी पार्टियों से समर्थन लेने में चीन और पाकिस्तान पीएम ओली की मदद कर रहे है। बताया जा रहा है कि इमरान खान तो इसके लिए ओली से संपर्क भी कर चुके है। वहीं, नेपाल में मौजूद चीनी राजदूत भी इसी कोशिश में लगी है कि ओली की सत्ता बनी रहे। नेपाल द्वारा उठाए जा रहे कुछ कदमों में चीनी राजदूत का हाथ बताया जा रहा है।

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