भारत को नहीं होगी चीन की जरूरत, देश में मिला बड़ा खजाना


कोरोना महामारी से बचाव के लिए दुनियाभर के कई हिस्सों में लगे लॉकडाउन से व्यापार बहुत प्रभावित हुआ है। भारत में भी करीब 40 दिन का लॉकडाउन लगा था। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ पर जोर दिया था। पीएम ने देशवासियों से कहा था कि हममे भारत को आत्मनिर्भर बनाना है और लोकल के लिए वोकल होने की अपील की थी।

इसी बीच भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बहुत अच्छी खबर आई है। दरअसल, झारखंड को खनिज संपदाओं का भंडार माना जाता है। हाल ही में राज्य में टंगस्टन जैसे महत्वपूर्ण तत्व के अकूत भंडार का पता चला है जो भारत को इस मामले में आत्मनिर्भर बना सकता है और चीन पर भारत की निर्भरता ख़त्म हो सकती है।

की जा रही है मैपिंग

टंगस्टन रेयर अर्थ एलिमेंट की श्रेणी में आता है। फिलहाल इसकी मैपिंग की जा रही है। जियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया इसपर काम कर रही है और साल के अंत तक मैपिंग और ड्रिलिंग शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल जीएसआई के अधिकारी इस बारे में कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं। झारखंड में टंगस्टन की यह पहली खदान है। भू वैज्ञानिक अनिल सिन्हा ने बताया कि झारखंड में टंगस्टन मिलने से देश इस मामले में आत्मनिर्भर बन जायेगा और दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी।

टंगस्टन का 100 फीसदी होता है आयात

टंगस्टन के लिए भारत अभी पूरी तरह दूसरे देशों पर निर्भर है यानि भारत अभी टंगस्टन का 100 फीसदी आयात करता है। देश में सबसे ज्यादा टंगस्टन चीन से आता है। चीन में 56 %, रूस में 5 %, वियतनाम में 3 % और मंगोलिया में 2 % टंगस्टन पाया जाता है। ऐसे में चीन से व्यापार कम करने की स्थिति में टंगस्टन का ये भंडार भारत के लिए काफी कारगार साबित होगा।

कहां होता है टंगस्टन का इस्तेमाल

टंगस्टन का इस्तेमाल फाइटर जेट, रॉकेट, एयरक्राफ्ट, एटॉमिक पावर प्लांट, ड्रिलिंग और कटिंग टूल्स, स्टेनलेस स्टील के वेल्डिंग , इलेक्ट्रोड, फ्लोरेसेंट लाइटिंग, दांत के इलाज के अलावा उच्च तापमान वाली जगह में इसका इस्तेमाल होता है। 2200 डिग्री सेंटीग्रेट तक तापमान वाली जगह पर इसका प्रयोग किया जा सकता है। लोहे की ताकत को बढ़ाने के लिए उसमे टंगस्टन मिलाया जाता है। पहले इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल बिजली के बल्ब में किया जाता था।


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