सरपंच से सांसद बनने वाले रघुवीर को मिल सकता है पायलट की बगावत का फायदा
मध्यप्रदेश में आए सियासी भूचाल से तख्तापलट हुई और शिवराज सरकार बनी। अब यही भूचाल राजस्थान की राजनीति में आया हुआ है। मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत से कमलनाथ सरकार गिर गई थी। अब राजस्थान में सचिन पायलट के बगावती तेवर ने गहलोत सरकार पर संकट खड़ा कर दिया है। अशोक गहलोत अपनी सरकार बचाने के लिए तमाम दाव-पेंच लगा रहे हैं।
अपने गुट को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायक दल की बैठक बुलाई है। हालांकि इस बैठक में सचिन पायलट शामिल नहीं होंगे। सचिन पायलट के बगावती रूख को देखते हुए कांग्रेस ने भी सख्त तेवर अपना लिए है। पार्टी ने विधायकों को व्हिप जारी किया है और कहा है कि जो इस बैठक में शामिल नहीं होगा उसे पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा।
ऐसे में यदि सचिन पायलट बैठक में शामिल नहीं होते है तो पार्टी उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा सकती है। हालांकि पायलट की बगावत का फायदा रघुवीर मीणा को मिलता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस रघुवीर मीणा को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंप सकती है।
ऐसा है मीणा का राजनीतिक सफ़र
रघुवर मीणा राजस्थान की राजनीति के वो नेता है जिन्होंने ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा तक का चुनाव जीता। मीणा ने 1988 में उदयपुर जिले की सारदा तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खारबर से ग्राम पंचायत का चुनाव जीता और सरपंच बने। 1993 में पहली बार सारदा विधानसभा चुनाव सीट से चुनाव लड़ा और विधायक बने। इसके बाद लगातार 2008 वे इस सीट से चुनाव जीतते रहे।
मीणा ने यूथ कांग्रेस से लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी तक कई अहम पदों पर जिम्मेदारी संभाली। सारदा विधानसभा सीट से विधायक रहते हुए मीणा अशोक गहलोत सरकार में मंत्री भी रहे। ऐसे में वह अशोक गहलोत के पुराने सहयोगी भी है। इसके साथ ही संगठन में उनका बड़ा अनुभव है। 2005 से 2011 तक वो राजस्थान कांग्रेस के महासचिव भी रहे और प्रदेश उपाध्यक्ष का पद भी संभाला।
ऐसे रघुवीर मीणा को कांग्रेस में कई पदों पर अनुभव है। इसके अलावा पार्टी ने उन्हें कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य के रूप में भी मौका दिया। इन्ही अनुभवों का फायदा अब मीणा को मिल सकता है और राजस्थान कांग्रेस की जिम्मेदारी उनके कंधों पर सौंपी जा सकती है।

Comments
Post a Comment