भयावह मंजर: मौत का तांडव, रात तक हो रहे अंतिम संस्कार



इंदौर:
मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के हालात बद से बदतर होते जा रहे है। कोरोना इस कदर अपना कहर बरपा रहा है कि, लोगों को ना सिर्फ इलाज के लिए जगह नहीं मिल रही है, बल्कि मरने के बाद भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। शहर में अस्पतालों से लेकर शमशान तक भयावह मंजर देखने को मिल रहा है। इलाज के लिए अस्पतालों के बाहर मरीजों की कतार लगी हुई है, तो मौत के बाद अंतिम संस्कार करने के लिए इंतजार हो रहा है।

शवों के लगातार आने की वजह से सूर्यास्त के बाद रात 10 बजे तक अंतिम संस्कार का काम चल रहा है। मरीजों को सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में बेड नहीं मिल पा रहे हैं, जिसकी वजह से लोगों का इलाज नहीं हो पा रहा है और मरने वालों की संख्या में बढ़ती जा रही है। मालवा मिल मुक्तिधाम में गुरुवार शाम तक 35 शव पहुंचे। इनमें 12 कोविड के थे।

श्मशान घाट पर काम करने वाले लोगों का कहना है कि लाशों का आना रुक नहीं रहा है। इंदौर के पंचकुइयां मुक्तिधाम में औसत 10 से 12 कोविड मरीजो का दाह संस्कार किया जा रहा है। बुधवार को 40 से 45 कोविड व सामान्य मौत का दाह संस्कार किया गया।  वहीं गुरुवार दोपहर तक 10 कोविड से हुईं मौत और 7 सामान्य मौत के शव आए।

इंदौर के रीजनल पार्क मुक्ति धाम में गुरुवार को 32 लाशें आई, जिसमें 21 लाशें कोविड पेशेंट की थी। आलम ये है कि श्मशान घाट पर काम करने वाले कर्चमारी भी अब बीमार पड़ने लगे हैं। रिजनल पार्क मुक्तिधाम के दो सेवादार घर चले गए हैं. जबकि रामबाग मुक्तिधाम के सेवादार ने बुखार और हाथ-पैर में दर्द के कारण छुट्टी ले ली।

रीति रिवाज तो छोड़िए सूर्यास्त के बाद रात 9 बजे, 10 बजे तक लाशों का अंतिम संस्कार हो रहा है। इंदौरे के ज्यादातर मुक्ति धामों का ऐसा ही हाल है।  पिछले तीन दिनों से जूनी इंदौर श्मशान घाट के बाहर शव जलाए गए। कोरोना की खतरनाक स्थिति का अंदाजा इसी लगाया जा सकता है।

रीजनल मुक्तिधाम में पिछले 12 सालों से काम कर रहे हरिशंकर कुशवाहा का कहना है कि, उन्होंने लाशों का ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा। वह लकड़ियां उठा उठाकर थक चुके हैं। रोज करीब 40 शव आ रहे हैं। यहां पर कोई काम करने के लिए तैयार नहीं है, बड़ी मुश्किल से दो लोगों को काम पर रखा है।  पहले तीन दिन में  अस्थियां देते है अब एक दिन में ही दे रहे हैं, क्योंकि हमारे पर बिल्कुल भी जगह नहीं है।




Comments