बच्चों को शिकार बना सकती है कोरोना की तीसरी लहर, हो जाएं सावधान

 



नई दिल्ली: देश में कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप जारी है। देश अभी इससे उबर भी नहीं पाया कि, तीसरी लहर की चेत्कावनी डराने लगी है। सबसे ज्यादा चिंता इसको लेकर सताने लगी है कि, इस लहर में बच्चे शिकार हो सकते हैं। कई राज्य सरकारों ने तो कोरोना की तीसरी लहर से निपटने और इसके प्रकोप से बच्चों को बचाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
 
अकेले महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने जानकारी दी है कि‍ राज्य में अब तक 0 से 10 साल के एक लाख 45 हजार 930 बच्चे कोरोना की चपेट में आए हैं। यहां हर दिन 300 से 500 के करीब बच्‍चे संक्रम‍ित हो रहे हैं। वहीं महाराष्‍ट्र में 11 से 20 साल के 3 लाख 29 हजार 709 बच्चे और युवा कोरोना का श‍िकार हुए हैं। ऐसे में बच्‍चों के लिए अभ‍िभावकों की चिंता पहले से कहीं बढ़ गई है। वे पूछ रहे हैं कि क्‍या हम बच्‍चों का पहले से इम्‍यून‍ सिस्‍टम ठीक रख सकते हैं?

डॉक्‍टर के मुताबिक बच्‍चों को आप तय सीमा के लिए सप्लीमेंट दे सकते हैं। इसमें 15 दिन के लिए जिंक, एक महीने का मल्‍टी विटामिन और एक ही महीने का कैल्‍श‍ियम का कोर्स करा सकते हैं। ये सभी चीजें इम्‍यूनिटी को बूस्‍ट अप करती हैं, लेकिन विटामिन के प्राकृतिक श्रोतों पर भी डिपेंड रहें।

इसके अलावा आप बच्‍चों को हर हाल में कोविड प्रोटोकॉल फॉलो कराएं। घर में किसी को सिंप्‍टम हैं या नहीं, लेकिन फिर भी बच्‍चों से थोड़ी सोशल डिस्‍टेंसिंग बनाकर रखनी ही रखनी है। इसके अलावा बच्‍चों को जुकाम या पेट की समस्‍याओं से बचाना है, क्‍योंकि इससे उन्‍हें इम्‍यूनिटी लॉस होता है।  इसलिए बच्‍चों को ज्‍यादा ठंडा पानी या तैलीय भोजन वगैरह से बचाएं। इसके बजाय उन्‍हें दालें, हरी सब्‍जियां और ताजे फल ख‍िलाएं।

श‍िशु बाल रोग विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बच्चों में हल्के लक्षणों को बिल्‍कुल भी नजरअंदाज ना करें।अगर बच्‍चे में डायरिया,  जुकाम, खांसी या सांस लेने की समस्‍या व थकान-सुस्ती जैसे लक्षण दिखें तो सतर्क हो जाएं और तत्‍काल डॉक्‍टर की सलाह लें। बच्‍चों की कोव‍िड जांच भी जरूर कराएं। इसके अलावा डॉक्‍टरी सलाह के बगैर बच्‍चे को एंटी वायरल ड्रग्स, स्टेरायड्स, एंटीबायोटिक आदि देना नुकसानदायक हो सकता है।

अपनाएं ये जरूरी टिप्‍स-

- बाहर से आने वाले लोगों के संपर्क में बच्‍चों को न लाएं।
- बच्‍चों को किसी भी फंक्‍शन या बाजार लेकर न जाएं।
- अगर घर में कोई बीमार है तो बच्‍चे को एन 95 मास्‍क पहनाकर रखें।  उसे एक ही कमरे में रखें।
- बच्‍चों को दूसरे बच्‍चों के साथ इस माहौल में खेलने की इजाजत न दें, उन्‍हें समझाएं।
- बच्‍चों का मनोबल ऊंचा रखें। उन्‍हें कोरोना को लेकर भयावहता न बताएं, बल्‍क‍ि उनसे वैज्ञानिक द्रष्‍ट‍िकोण से ही बात करें।

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