क्या लॉकडाउन सिर्फ आम आदमी के लिए है?
सुरभि भावसार
आम आदमी लॉकडाउन में पिछले दो महीने से ज्यादा से घरों में कैद है। कुछ जरुरी काम के लिए भी यदि घर से बाहर निकलते है, तो उन्हें पुलिस का सामना करना पड़ता है। लेकिन लगता है कि लॉकडाउन के नियम नेताओं पर लागू नहीं होते। सिर्फ नेता ही नहीं इनके समर्थकों को भी लॉकडाउन में किसी तरह की रोक-टोक नहीं है। वे कही भी भीड़ लगा सकते है, कही भी आ-जा सकते है, लेकिन पुलिस इन्हें नहीं रोकती।
यूं तो कोई आम आदमी बहार निकल जाए तो पुलिस उन्हें रोक लेती है लेकिन बिहार में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के बहार समर्थकों का जमावड़ा लग जाता है और पुलिस को शायद भनक तक नहीं लगती। शायद कोरोना भी जानता है कि ये किसी नेता के समर्थक है और मुझे यहां संक्रमण नहीं फैलाना है।
इस मामले पर तेजस्वी यादव कहते है कि गोपालगंज में ट्रिपल मर्डर का शिकार हुए पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे है और इस दौरान वे सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रख रहे है। शायद वे भूल गए है कि सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब भीड़ लगाना नहीं, बल्कि एक-दूसरे से दो गज की दूरी रखना है।
तमाम पुलिस बल एक नेता को रोकने के लिए तैनात कर दिया जाता है, फ़ोर्स लगा दी जाती है लेकिन उसके बावजूद समर्थक उनके घर के बहार जमा हो जाते है। पुलिस के लाख रोकने के बावजूद वे अपने आवास से बाहर निकल जाते है।
वहीं, कई जगह इस संकट की घड़ी में साथ मिलकर मुकाबला करने की बजाय राजनीति हो रही है। पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लॉकडाउन का पालन नहीं करने की धमकी दी है। उनका कहना है 'अब मैं लॉकडाउन का पालन नहीं करूंगा। मैं देखना चाहता हूं कि राज्य सरकार क्या करेगी और मैं चैलेंज करता हूं। हम लोग जब भी राहत साम्रगी बांटने के लिए घरों से निकलते हैं तो पुलिस हमें रोकती है।'
राहत सामग्री बांटने का मतलब ये नहीं है कि कोरोना आपके दान-पुन्य से खुश होकर आपसे दूर रहेगा। राहत सामग्री बांटते समय भी आपको नियमों का पालन करना होगा, तभी हम कोरोना के खिलाफ जंग जीत पाएंगे। ये सब देखते हुए तो सवाल उठना लाज़मी है कि क्या लॉकडाउन के नियम नेताओं के लिए नहीं है? आम जनता के लिए ही सरकार नियम बनाती है।

ये लोग सिर्फ 'रायता' फैलाने वाले हैं
ReplyDeleteराहत सामग्री तो बहाना है
ReplyDeleteराहत सामग्री तो बहाना है
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