जनादेश...

 


लोकतंत्र में ताकतवर नेता नहीं, जनता होती है और यह बात हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में सभी ने देख भी ली है। जिस जनता ने एक मुख्यमंत्री को अपना भरपूर समर्थन देकर ना सिर्फ प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठाया बल्कि सबसे चमकते तारे के रूप में फलक तक पहुंचाया। 10 साल बाद ऐसा क्या हुआ कि इसी जनता ने एक झटके में आपकी चमक फीकी कर दी। क्या आप जनता के विश्वास पर खरे नहीं उतर पाए? क्या जिन वादों से प्रभावित होकर जनता ने आपको सत्ता की चाबी सौंपी थी उन्हें पूरा करने में कोई कमी रह गई या आप जनता को मूर्ख समझकर खुद को सर्वश्रेष्ठ मानने लगे थे? वजह जो भी हो लेकिन सबक बहुत बड़ा है। बेशक आप हारे नहीं है, दिल्ली के सिंहासन पर आप ही विराजमान होंगे लेकिन उसके चारों पैर अलग–अलग होंगे। आपको उनके बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।


2014 के लोकसभा चुनाव में जनता ने अपना पूर्ण समर्थन देकर आपको अपना राजा चुना। पहली बार लोकतंत्र के मंदिर में प्रवेश करने से पहले आपका दंडवत होना और फिर संविधान को नमन करने ने यह साफ कर दिया था कि आप जनसेवा के लिए समर्पित है। प्रधानसेवक के रूप में आपका जनता और देश के प्रति समर्पण दिखा भी। जमीनी हालातों को समझकर आपने देश को शौच से मुक्त किया, महिलाओं को चूल्हे के धुंए से आजादी दिलाई, सबसे आखिरी तबके के व्यक्ति को बैंक से जोड़ा..और भी ऐसे अनेकों कार्य है। यही कारण है कि 2019 में जनता ने आप पर अपना पूरा प्यार लूटा दिया और पहले से ज्यादा सीटों के साथ आपने सत्ता पर वापसी की। उस दौरान आपकी लोकप्रियता की आंधी में विपक्ष के बड़े–बड़े नेताओं को धूल चटा दी। लगातार दूसरी बार देश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। इस कार्यकाल में राजा को शायद ये लगने लगा था कि वह ही सर्वश्रेष्ठ है। जनता की आवाज दबाई जाने लगी और आदेश थोपे जाने लगे। आम जनता की आवाज बनने के लिए कोई मजबूत विपक्ष भी नहीं था। जनता सबकुछ सहती रही और जब मौका आया तो दिखा दिया कि हमने ही आपको सरताज बनाया था। हम ताज पहनना जानते हैं तो उसे छीनने का हुनर भी बखूबी रखते हैं।


2024 के आम चुनाव के नतीजों में भाजपा जीत कर भी हार गई और विपक्ष हार कर भी जीत गया। ऐसा इसलिए क्योंकि लगातार दो बार से नरेंद्र मोदी अपनी पार्टी के दम पर प्रधानमंत्री बने, जबकि इस बार उन्हें इसके लिए सहयोगियों की मदद लगेगी। वहीं, देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए एक मजबूत विपक्ष की जरूरत थी, जो इस बार पूरी हुई। 10 सालों से वनवास काट रही कांग्रेस ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी और भाजपा को उसी के गढ़ में पटकनी दे दी। सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर है कि जिस राम मंदिर को भाजपा ने सबसे बड़ा मुद्दा बनाकर पूरी दुनिया में हल्ला मचाया था, उसी अयोध्या में वे अपनी सीट नहीं बचा पाए। यह जनादेश राजनेताओं के लिए सबक है कि आपके लिए जनादेश सर्वोपरि होना चाहिए। जिसके दम पर आप ताकतवर बने हैं, उसे नजरंदाज करने की कोशिश न करें। राजनीति में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए आम जनता को उसके अधिकार से दूर मत कीजिए वरना इतिहास गवाह है जब–जब जनता ने ठाना है, राज सिंहासन डोला है। यही लोकतंत्र की ताकत है और यही खूबसूरती भी है।


मोदी सरकार 3.0 के सामने कई चुनौतियां होंगी। सबसे बड़ी चुनौती एक बार फिर जनता का विश्वास जीतना है क्योंकि अब जनता जागरूक हो गई और अपनी जरूरतों को समझने लगी है। देश के बड़े मुद्दों के दम पर आप दुनिया में अपना कद बढ़ा सकते हैं लेकिन आम लोगों के बीच लोकप्रियता बनाए रखने के लिए आपको जमीन पर उतरकर हालात सुधरने होंगे। मंचों पर से घोषणाएं करने के साथ धरातल पर भी उन्हें साकार करना होगा। इस बार जनता ने ट्रेलर दिखाकर एक और मौका दिया है। इससे सबक लेकर सुधार नहीं किया गया तो इसमें कोई शक नहीं है कि अगली बार तस्वीर बदल भी जाए। इसके साथ ही सहयोगियों को साथ लेकर चलना और विपक्ष के विरोध को सहते हुए आगे बढ़ना होगा। 

सुरभि भावसार

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